अर्थ:
पृथ्वी माता को प्रणाम है, जो हमारे जीवन का आधार है। वह क्षमा की मूर्ति हैं और अपनी सहनशीलता से हमें सदा स्थिरता प्रदान करती हैं। पृथ्वी माता सभी प्राणियों की रक्षक हैं, जल, वायु और अन्न की पोषिका हैं। उनके पर्वत मुकुट के समान और नदियाँ उनकी माला के रूप में शोभा पाती हैं। वन उनकी हरित चादर हैं, जो शीतलता और शांति देते हैं। हम सदा उनकी कृपा के लिए कृतज्ञ हैं।
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